“लम्हें”

वो लम्हा ही क्या जिसमें तुझसे झगड़ा ना हो,

क्योंकि हर लम्हें में तेरा ज़िक्र ज़रूरी हैं मेरे लिए…!

Shabdsiyapaaa©

Author: Shabd Siyapaa

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