“Khamoshi”

दुनिया कहती हैं कि
थोड़ा खामोश रहना सीखो

लेकिन
ख़ामोश रहना बेहतर हैं
बस तब तक
जब तक खामोशियाँ
कमोजोरी ना बनने लगे

ख़ामोशी तब तक ही सही
जब तक कि ज़रूरत है
वरना यही खामोशी
कभी कभी इंसान को
लाचार बेबस बना देती हैं

खामोशी से ऊपर उठकर
जीना भी एक ज़िन्दगी हैं
वरना जहन में दबी खामोशी से
ज़िन्दगी बस घुट कर रह जाती हैं

Shabdsiyapaaa©

Author: Shabd Siyapaa

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