“Kismat”

किस्मत जरा खफ़ा हैं अभी
वक़्त से बेईमानी जो कि हैं हमने
सम्भलने की कोशिश हैं थोड़ी
क्योंकि बेफ़िज़ूली में वक़्त बहुत गवाया हमने
किस्मत फिर मुट्ठी में होगी
क्योंकि चलें हैं फिर से वक़्त के वफ़ादार बनने

Shabdsiyapaaa©

Author: Shabd Siyapaa

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